दरकने लगी दोस्ती की दीवार….

आनंद कौशल/ प्रधान संपादक, देश-प्रदेश मीडिया

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के कई ठिकानों पर छापेमारी के बाद अब कई सवाल उठ खड़े हो गए हैं। सोमवार को बिहार के मुखिया नीतीश कुमार प्रेस से बात करते हैं और कहते हैं कि अगर भाजपा के पास लालू के खिलाफ़ सबूत हैं तो उसे कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए ना कि मीडिया में केवल मामले का पर्दाफाश। इधर, मंगलवार को ताबड़तोड़ आयकर विभाग की छापेमारी शुरू हो जाती है। लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के रिश्ते आजकल ठीक नहीं चल रहे ऐसा देश प्रदेश मीडिया बार-बार कहता रहा और हम लगातार तथ्यों और राजनीतिक दांव-पेंच के आधार पर समीक्षात्मक रिपोर्ट भी आपके सामने लाते रहे लेकिन लालू प्रसाद और नीतीश की दोस्ती का दम इतना जल्दी निकल जाएगा किसी ने सोचा ना था। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने पिछले कुछ दिनों से बिहार का राजनीतिक तापमान इस कदर बढ़ा दिया था कि मई की गरमी भी फींकी पड़ जा रही थी। मोदी के लगातार हमलों का माकूल जवाब किसी के पास नहीं था और आयकर विभाग की इस छापेमारी ने सभी सवालों के सही जवाब दे दिए हैं। पूरे मामले पर मुख्यमंत्री की चुप्पी असहज थी औऱ ये उनकी अपनी शख्सियत के विपरीत भी थी क्योंकि भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जीरो टालरेंस की उनकी नीति और भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जब्ती की कार्रवाई पहले से ही दुनिया के लिए नजीर रही है। हालांकि लालू पूरे मामले पर अभी भी भाजपा को चुनौती देते नज़र आए और एक के बाद एक ट्वीट कर साफ कर दिया कि एक लालू को दबाने से क्या होगा कई और लालू निकल आएंगे। सोमवार को उपमुख्यमंत्री और राजद के नेता तेजस्वी यादव ने भी लालू परिवार को छोड़ बांकियों पर भी कार्रवाई की मांग कर डाली थी। अब जबकि लालू चौतरफा हमलों से घिर गए हैं तो उनका भीतरी दर्द भी सतह पर आने लगा है। राजद सूत्रों की मानें तो इस फैसले से कोई हैरत नहीं हो रही क्योंकि उन्हें मालूम था कि भीतरघात से ही महागठबंधन की दीवार में सेंध लगेगी। आईटी विभाग के हाथ अहम दस्तावेज लगे हैं और जैसा कि कहा जा रहा है हज़ारों करोड़ की बेनामी संपत्ति को लेकर इसे बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं, राज्यसभा सांसद और पूर्व कंपनी मामलों के मंत्री प्रेमचंद गुप्ता सहित परिवार के बांकि सदस्यों पर भी जांच की आंच तेज हो गई है। राजद सुप्रीमो पहले से ही चारा घोटाला में आरोपी क़रार दिए जा चुके हैं और एक के बाद एक कार्रवाई से पार्टी पर फिलहाल संकट के बादल घिर गए हैं। प्रधानमंत्री के नोटबंदी के फैसले की मुखालफत करने वाले लालू प्रसाद भी ये मान रहे हैं कि इस आग को लगाने वाले उनके अपने हैं और उन्होंने चुनौती दे दी है कि वो इस कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं लेकिन क्या सरकार की सेहत पर इसका असर नहीं पड़ेगा ये सवाल बड़ा ही मौजूं हो गया है तो इस मामले पर देश प्रदेश मीडिया की रिपोर्ट कहती है कि महागठबंधन की बुनियाद पूरी तरह से हिल चुकी है और लालू प्रसाद इसे पिछले कुछ दिनों से महसूस भी कर रहे हैं। इधर, नीतीश कुमार को भाजपा में वापस लाने की भीतरी तैयारी शुरू हो चुकी है क्योंकि प्रधानमंत्री की रेस से बाहर होकर नीतीश कुमार ने खुद को बड़ा दिलवाला भी साबित कर दिया है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि दोस्ती के जिस दम पर सरकार टिकी थी उसका भविष्य कितना मजबूत है। आईटी विभाग ने पूरे मामले का अभी तक खुलासा नहीं किया है लेकिन लालू को पता है कि वो इस मामले से इतनी आसानी से नहीं निकल सकते लिहाजा खुद को बचाने की चिंता सरकार बचाने की चिंता से ज्यादा बड़ी हो गयी है।

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