अब नहीं तो कब जागेंगे हम?

आनंद कौशल/ प्रधान संपादक, देश-प्रदेश मीडिया

भारत की लगातार बढ़ती जनसंख्या ने अब पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अबतक यही लग रहा था कि चीन दुनिया की सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश है और भारत दूसरे नंबर पर है। हालांकि हमारे देश में हर दस साल पर जनगणना करायी जाती है औऱ इसके हिसाब से हमारे देश में जनसंख्या के आंकड़े जारी किए जाते हैं और पिछले आंकड़े के हिसाब से भारत चीन के बाद आबादी के लिहाज से दूसरा देश है लेकिन चीन के एक रिसर्चर की मानें तो चीन की वास्तविक जनसंख्या भारत से कम है। चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान यी फुक्सियान ने दावा किया कि साल 1991 से 2016 के दौरान चीन में 377 मिलियन जन्म हुए जबकि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पहले इसे 465 मिलियन बताया गया है। इस हिसाब से चीन की वास्तविक जनसंख्या 90 मिलियन कम होने चाहिए और इस तरह से देखा जाए तो भारत की आबादी एक अरब 32 करोड़ के मुकाबले चीन की वास्तविक आबादी केवल एक अरब 29 करोड़ ही है। आंकड़ों के बाद यूएनओ की चिंता भी बढ़ गयी है क्योंकि भारत इस आंकड़े को या यों कहें कि चीन को साल 2022 में पीछे छोड़ने वाला था। हमारा देश पहले से ही अल्प संसाधनों और मांग-पूर्ति की असमान अवस्था के बीच स्थित है और जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी के बाद संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ से जनसंख्या विस्फोट जैसी स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता। किसी वक्त हमारे देश की बढ़ती जनसंख्या पर एक विचारक ने कहा था। “The womb is slower than bomb but it may probe just as deadly suffocation rather than incineration may mark the end of the human story.” जनसंख्या नियंत्रण को लेकर अब बहस से ज्यादा जरूरी है कि एक सख्त नीति बनायी जाए और उसे कड़ाई से लागू करायी जाए ताकि राजनीति से इतर हमारे देश का भला हो। कल तक हम चीन के बाद दूसरे सबसे ज्यादा आबादी वाले देश थे आज देखते ही देखते हम इस मामले में नंबर वन हो गए लेकिन ये बात भूल गए कि प्राकृतिक संसाधनों में कोई वृद्धि नहीं हुई। हम महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, अशिक्षा, असमानता, कुपोषण और बीमारी जैसी बुनियादी समस्याओं से अगर आज भी ग्रस्त हैं तो इसका एक ही कारण है कि बढ़ती जनसंख्या। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर अब तक के तमाम सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं और दुनिया भर के तमाम देशों के मॉडल की नकल करते वक्त हम चीन के ही जनसंख्या माड्यूल को भूल जाते हैं। चीन ने वन चाइल्ड पॉलिसी का बहुत ही सख्ती से पालन कराया और इसका नतीजा सबके सामने है। चीन में जनसंख्या में जो कमी की उम्मीद की गयी थी उससे कहीं ज्यादा कमी देखने को मिली लेकिन हमारे देश में आज तक इस ओर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। राजनीति और अवसरवाद की भेंट चढ़ चुकी हमारी व्यवस्था ने आज जो चौंकाने वाली जानकारी दी है उससे एक बात तो स्पष्ट है कि हमारे देश में वस्तुओं की मांग और पूर्ति के बीच जबरदस्त संतुलन बिगड़ने वाला है और महंगाई में कमी की उम्मीद तो छोड़ ही दी जानी चाहिए। आज और अभी से सरकार को इस मामले में गंभीरता से विचार करना चाहिए और जनसंख्या नियंत्रण के लिए ठोस कानून लाकर इसे कड़ाई से पालन कराना चाहिए। बढ़ती जनसंख्या हमारे जीवन स्तर को काफी बुरे तौर पर प्रभावित करता है। हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई-जैन-बुद्ध नहीं बल्कि हर भारतवासी के लिए जनसंख्या स्थिरिकरण का नारा प्रभावी हो। हम एक मुहिम चलाकर आने वाले दस सालों के लिए एक कारगर नीति तैयार कर इसे प्रयोगात्मक तौर पर लागू कर सकते हैं। अगर परिणाम सकारात्मक आते हैं तो इसे आगे बढ़ाया जाए अन्यथा और कड़े नियम अमल में लाए जाएं। हमें यह समझ लेना चाहिए कि खतरे की घंटी को हम पहले ही अनसुना कर चुके हैं और अब खतरा सर पर है।

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