एक आईडिया ने तोड़ी गुमनामी, बिहार की बेटी को मिलेगा राष्ट्रपति से अवार्ड

(मुकेश कुमार सिंह)

पटना- बिहार के फुलवारीशरीफ की मुन्नी ने कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिससे उसकी तारीफ़ अब पूरा देश कर रहा है। उसके नायाब आईडिया की धमक राष्ट्रपति भवन तक पहुँच गई है। भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अब उसे सम्मानित करेंगे। देशभर के हजारों छात्र-छात्राओं को पीछे छोड़ते हुए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट प्रतियोगिता में चयनित 32 बच्चों में मुन्नी अपना नाम जुड़वाने में सफल रही है। अब राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी सात नवंबर को दिल्ली में मुन्नी को सम्मानित करेंगे। इस बिटिया का नाम मुन्नी कुमारी है, जो फुलवारीशरीफ के फतेहपुर टोला के एक बेहद मामूली परिवार में जहां फटेहाली और मुफ़लिसी कुलाचें भरती हैं, वहाँ इसने जन्म लिया। मुन्नी के दादा जीवनभर बैलगाड़ी चलाते रहे। पिता नरेंद्र राम राजमिस्त्री का काम करते हैं। मुन्नी अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। वह राजकीय मध्य विद्यालय ढिबरा में सातवीं कक्षा में पढ़ती है। मुन्नी से हमने बड़ी सिद्दत से बात करी ।वह कहती है कि मुझे मैथ बनाने में अच्छा लगता है। नंबर भी उसे मैथ में बढ़िया मिलता है ।आगे वह इंजीनियर बनकर देश की सेवा करना चाहती है।

आखिर मुन्नी को कैसे आया यह आईडिया

मुन्नी बताती है की एक दिन एक सर हमारे स्कूल में आए ।आज से तक़रीबन छह महीने पहले। उन्होंने कक्षा छः से आठ तक के सारे बच्चों से कहा कि कुछ नयी चीज बनाने का आइडिया लिखो। क्या नया बनाना चाहिए जिससे लोगों को सहुलियत हो और लोग उसका फायदा उठा सकें। सारे बच्चे लिखने लगे। मैं भी सोचने लगी की क्या नया बनाना चाहिए। तभी मेरे मन में आया कि क्यों ने एक ऐसा सिस्टम बन जाए जिससे कार के गेट में अंगुली दबने का खतरा खत्म हो जाए। क्योंकि एक बार एक कार के गेट में मेरी अंगुली दब गई थी ।फिर इसी को मैंने अपने दिमाग से चुना और फिर रेड लाइट जलनेवाला आइडिया मैंने लिख दिया। अपना आईडिया लिख कर मैंने कॉपी जमा कर दी ।बाहर से आए सर सभी बच्चों की कॉपियां लेकर चले गए ।हमलोग तो भूल भी गए थे की एक सर आये थे और हमसभी से नया आईडिया लिखवाकर ले गए थे। लेकिन जब मुझे इस बात का पता चला कि मेरा चयन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट प्रतियोगिता में हो गया है और मुझे राष्ट्रपति से पुरस्कार मिलेगा तो मेरे ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। पहले तो उसे यकीन ही नहीं हो रहा था की इतनी छोटी जगह की रहने वाली और गरीबी से रोजाना लड़ने वाली वह आखिर राष्ट्रपति के पास जायेगी कैसे ?लेकिन बात पुरे इलाके में फैली और सबकुछ फिर सामान्य हुआ और बातें मुन्नी राष्ट्रपति से मिलने जायेगी पर आकर ठहर गयी। आप यह सुनकर हैरान हो जाएंगे की मुन्नी ने यह संदेश दिया है कि हमेशा कुछ नया सोचिए। समाज के लिए सोचिए और नया कीजिये। देशभर के 55 हजार 89 छात्रों का आइडिया दिल्ली पहुंचा था लेकिन उसमें से सिर्फ 32 छात्रों के आइडिया को चुना गया जिसमें से मुन्नी एक है। अब इस आइडिया का पेंटेंट होगा। मुन्नी आगे चल कर इंजीनियर बनना चाहती है और देश का नाम रौशन करना चाहती है। मुन्नी ने छोटी उम्र में यह साबित कर दिखंया है की मेधा कहीं भी पल बढ़ सकती है।

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