वाम किले पर लहराया केसरिया, कांग्रेस का सफाया

अगरतला- त्रिपुरा में पिछले विधानसभा चुनाव तक खाता भी नहीं खोल पायी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बार अपने जबर्दस्त प्रदर्शन से वामदलों के ढाई दशक पुराने किले को ढहा कर नया इतिहास रच दिया, साठ सदस्यीय विधानसभा की 59 सीटों पर चुनाव हुये थे जिनमें भाजपा ने इस बार चाैंकाने वाला प्रदर्शन करते हुये अकेले 34 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है और एक सीट पर वह आगे चल रही है। इस चुनाव मेें उसकी सहयोगी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) को आठ सीटों पर जीत मिली है। इस तरह भाजपा गठबंधन को विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक बहुमत मिला गया है। भाजपा की इस जीत से राज्य में 25 वर्ष से चले आ रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के शासन का अंत हो गया है। पिछले चुनावों में 50 के आस-पास जीतने वाला वाम मोर्चा इस बार 16 सीटों पर सिमट गया है। उसने 13 सीटों पर विजय हासिल की है और तीन पर उसके उम्मीदवार आगे हैं। पश्चिम बंगाल के बाद उसका एक और गढ़ ध्वस्त हो गया है। वाम मोर्चे की अब सिर्फ केरल में सरकार रह गयी है। त्रिपुरा में शून्य से शिखर तक भाजपा के सफर का सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को हुआ है। इस बार वह एक भी सीट नहीं जीत सकी जबकि पिछले चुनाव में उसे 10 सीटें मिली थीं।

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