सत्याग्रह आंदोलन में तीसरे दिन बिगड़ने लगी है अन्ना की तबीयत

रामलीला ग्राउंड में अन्ना के सत्याग्रह आंदोलन का आज तीसरा दिन है. अन्ना अनिश्चितकाल भूख-हड़ताल पर बैठे हैं. अन्ना हजारे ने ये कदम कितानों के साथ हो रहे अत्याचार और लोगपाल के लिए उठाया है. अन्ना हजारे के आंदोलन को धीरे-धीरे समाज के दूसरे प्रतिष्ठित लोगों का भी समर्थन मिल रहा है. इस बीच आज गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के आंदोलन में हिस्सा लेने की संभावना है. हालांकि, वह शनिवार को आने वाले थे लेकिन उनका कार्यक्रम रद्द हो गया. वैसे अन्ना ने पहले ही साप कर दिया है कि किसी भी सियासी दल और चेहरे को मंच पर जगह नहीं मिलेगी. इस बार अन्ना ने पहले वाली गलती से सीख लेते हुए कई शर्तें रखी हैं. उन्होंने साफ कहा है कि अगर कोई सियासी दल या व्यक्ति सत्याग्रह में शामिल होना भी चाहता है तो उसे मंच से नीचे जनता के बीच में बैठना होगा. साथ ही अन्ना ने एक और कड़ा कदम उठाते हुए सत्याग्रह में शामिल होने वाले लोगों के लिए एक शर्त रखी है. अन्ना का कहना है कि जो भी इंसान सत्याग्रह में भाग लेना चाहता है तो उसे एक शपथ पत्र देना होगा. वह शपथ पत्र में लिखकर देगा कि वह भविष्य में किसी भी सियासी दल में नहीं जाएगा, अपनी पार्टी नहीं बनाएगा. इसी बीच ‘वाटरमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर राजेंद्र सिंह शनिवार को हजारे से मिलने पहुंचे थे.वहीं, हजारे के सहयोगियों ने दावा किया कि भूख हड़ताल के कारण अन्ना हजारे का वजन घट गया है. अन्ना ने अपनी मांगों को लेकर केंद्र में मोदी सरकार 43 पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. आहत होकर उनको आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी. सरकार से अन्ना की पहली मांग ये है कि सिर्फ खेती पर निर्भर 60 से अधिक उम्र के किसानों को पांच हजार रुपये पेंशन मिले. कृषि मूल्य आयोग को संवैधानिक स्थान और संपूर्ण स्वायत्तता दी जाए. किसानों की फसल का सामूहिक (मंडल) नहीं बल्कि व्यक्तिगत बीमा किया जाए. लोकपाल कानून को कमजोर करने वाली धारा 63 और 44 में किए गए संशोधन रद किए जाएं. लोकपाल लोकायुक्त कानून पर तुरंत अमल हो और लोकपाल की नियुक्ति की जाए. केंद्र के लोकपाल के तहत हर राज्य में सक्षम लोकायुक्त कानून लागू हो. बैलेट पेपर पर उम्मीदवार की रंगीन तस्वीर को चुनाव चिह्न बनाया जाए. वोटों की गिनती के लिए टोटलाइजर मशीन का प्रयोग किया जाए. चुनाव में दिए गए आश्वासन पर चुनकर आने के बाद वादे पूरे नहीं किए जाने पर जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार जनता को होना चाहिए.

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