विकास दर की नयी ऊंचाइयों को छू रहा है बिहार

बिहार एक महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक दौर से गुजर रहा है जहाँ राष्ट्र के विकास में बिहार राज्य की सहभागिता कई गुना बढ़ी है | विगत कुछ वर्षों में बिहार ने अपने प्रबल मानव संसाधन के बल पर एक अभूतपूर्व मुकाम हासिल किया है जिसमें राज्य सरकार के कुशल आर्थिक प्रबंधन और सामाजिक योजनाओं की भूमिका अद्वितीय है | पिछले एक साल में पूरे विश्व में आर्थिक वित्तीय ढांचे में एक व्यापक बदलाव महसूस किया है जिसका प्रभाव बिहार समेत पूरे देश पर पड़ा है |

जहाँ एक ओर वैश्विक आर्थिक विकास बेहतर हुआ और पूरी दुनिया का संयुक्त विकास दर 3 प्रतिशत के आस पास रहने की संभावना है वहीँ जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण के स्तर ने आर्थिक सामाजिक विकास पर प्रतिकूल असर किया है | वर्तमान परिदृश्य में राजकीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में सूचना प्रौधोगिकी के अनुकलन ,वैज्ञानिक एवं आर्थिक अनुसन्धान ,सटीक एवं सामयिक नीति निर्माण और कुशल प्रबंधन की अहम भूमिका होगी जिसका सीधा प्रभाव राज्य के आर्थिक आय और व्यय पर पड़ेगा | इस दिशा में केंद्र सरकार के द्वारा लागू किया गया जी.एस.टी. कर प्रणाली राष्ट्र एवं राज्य की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने का एक शानदार उदाहरण है | जी.एस.टी. कर प्रणाली का बिहार ने न सिर्फ सबसे पहले समर्थन किया बल्कि उसे क्रियान्वित करने के लिए ठोस आर्थिक एवं वित्तीय कदम उठाये जो दर्शाता है कि बिहार नयी व्यवस्था निर्माण के लिए कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए कटिबद्ध है |
सेवा क्षेत्र (Service Sector) में बेहतर विकास की वजह से अर्थव्यवस्था में कुछ बुनियादी संरचनात्मक बदलाव हुए हैं | सेंट्रल स्टैटिस्टिकल ओर्गेनाईजेशन ने 2011-12 को मूल वर्ष मानते हुए GSDP के लिए नए आंकड़े प्रस्तुत किए जिसमें बिहार की पिछले साल की विकास दर को 10.3% बताया और यह राष्ट्रीय GDP दर 7% से लगभग 3% अधिक है |

बिहार के बेहतर आर्थिक विकास दर का राज्य के सामाजिक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रभाव पड़ा है | गरीबी अनुपात की दर 2004-05 के 54.4 प्रतिशत के मुकाबले घाट कर 33.7 प्रतिशत हुई है जो आने वाले समय में और बेहतर होने की संभावना है | साल 2011-12 के स्थायी मूल्य दर से 2016-17 के लिए बिहार राज्य का कुल GSDP 3.32 लाख करोड़ रूपये था और प्रति व्यक्ति GSDP 28,178 रूपये था | वर्तमान मूल्य दर से 2016-17 का अनुमानित GSDP 4.38 लाख करोड़ रूपये था और अनुमानित प्रति व्यक्ति GSDP 38,546 रूपये था | वर्ष 2018-19 में GSDP 5,15,634 करोड़ रूपये रहने का अनुमान है |

अगर अलग अलग क्षेत्रों के बिहार के विकास में योगदान की बात करें तो साल 2016-17 में प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector) की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत रही जो 2011-12 के 25.8 प्रतिशत के मुकाबले 4.8 प्रतिशत कम है | इसका सीधा प्रभाव द्वितीयक (Secondary Sector) एवं खास कर तृतीयक क्षेत्रों के विकास के बढ़ोतरी के रूप में पड़ा है | पिछले साल तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector) की भागीदारी 55.5 प्रतिशत से बढ़कर 61 प्रतिशत हुई है | यह साफ दर्शाता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था बहुआयामी हुई है और भविष्य में इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन एवं आर्थिक विकास की संभावनाओं को और बल मिलेगा | बिहार को विकास और श्रेष्टता सम्बंधित 2017 में कई राष्ट्रीय प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए | राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति शून्य टोलेरेंस नीति का ही परिणाम है कि राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रथम मुफ़्ती मोहम्मद सईद पुरस्कार ‘ सार्वजनिक जीवन में शुचिता’ के लिए जम्मू –कश्मीर सरकार द्वारा नवाजा गया | नवाचारी प्रयोग के रूप में ‘बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम ‘ को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बिहार सुधार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी एवं जिला पदाधिकारी ,बांका को सूचना प्रावैधिकी का उपयोग कर सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए “उन्नयत बाँका” अभियान के लिए ‘कलाम इनोवेशन इन गवर्नेंस अवार्ड’ प्रदान किया गया | जिला पदाधिकारी,नालन्दा को भी लोक प्रशासन में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार ,2017 से सम्मानित किया गया | वहीँ ‘बिहार म्यूजियम’ को अन्तराष्ट्रीय ब्रांडिंग और कार्पोरेट कम्युनिकेशन श्रेणी में IF Design Award के लिए चुना गया है | 6,400 प्रविष्टियों में से बिहार म्यूजियम को 63 अन्तराष्ट्रीय विशेषज्ञ जूरी द्वारा अवार्ड के लिए चयनित किया गया है | वर्ष 2017 में मक्का उत्पादन में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए भारत सरकार द्वारा राज्य को ‘कृषि कर्मण पुरस्कार’ दिया गया है | पटना स्थित सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर को CIDC द्वारा उत्कृष्ट वास्तुशिल्प के लिए 10वें विश्वकर्मा पुरस्कार के लिए चुना गया |

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