प्रयागराज बना इलाहाबाद और फिर वापस प्रयागराज

न्यूज़ डेस्क

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को प्रदेश के एक मुख्य शहर इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के इस घोषणा इस बाद कुछ लोगों को खुश तो कुछ लोगों को क्षुब्ध होते हुए भी देखा जा रहा है। आइये जानते हैं इस शहर के नाम का सफर:

पौराणिक एवं धार्मिक मान्यताओं की माने तो इस शहर का नाम प्रयागराज है। बाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम प्रयाग में भारद्वाज ऋषि के आश्रम होते हुए वन गए थे। भगवान श्रीराम जब श्रृंगवेरपुर पहुंचे तो वहां प्रयागराज का जिक्र आया था। सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक पुराण मत्स्य पुराण के अध्याय 102 से 107 तक प्रयागराज के माहात्म्य का वर्णन है। संतों के अनुसार यह शहर गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम स्थल होने के साथ ही तप और यज्ञ की भूमि रही है। पुराणों में इसका बहुत ही महत्ता है। यहां के संगम के जल से पुराने समय मे राजाओं का अभिषेक किया जाता था। 

प्रयागराज से इलाहाबाद

कहा जाता है पूर्व में इस शहर का नाम प्रयागराज ही था जिसे करीब 1574 के लगभग में अकबर ने नाम बदलकर इलाहाबाद कर दिया। कहा जाता है उस समय अकबर ने प्रयागराज में अपना किला बनवाया था और तभी नाम भी  बदल दिया था।

इलाहाबाद से प्रयागराज

पिछले कई वर्षों से इस शहर का नाम इलाहाबाद से बदल कर प्रयागराज करने की मांग संत समाज के द्वारा किया जा रहा था। प्रदेश में योगी सरकार के बनते ही वादा किया था कि इलाहाबाद का नाम बदलकर जल्द ही पुनः प्रयागराज किया जाएगा। इस वादे के बाद स्थानीय लोग एव संत योगी को नाम यथाशीघ्र बदलने की भी मांग कर रहे थे जिसका योगी ने शनिवार को घोषणा कर दिया।

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